

"अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया देह और देह की दुनियां से देह और देह की दुनियां से पल भर में मुक्त कर दिया अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया चिंता है ना कोई फिकर है दिव्य चिंतन का दिल में असर है चिंता है ना कोई फिकर है दिव्य चिंतन का दिल में असर है हम पे सदा जो प्रभु की नजर है हम जो करते उसको खबर है दिल में बसाकर दिलबर हमें दिल में बसाकर दिलबर हमें कितना ऊंचा उठा दिया देह और देह की दुनियां से पल भर में मुक्त कर दिया अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया हर नस नस में प्रभु का प्यार आनंद की अब तो बहती है धार हर नस नस में प्रभु का प्यार आनंद की अब तो बहती है धार अंतर से निकले दुआएं अपार ऐसा अनोखा पाए उपहार सम्मुख आकर मुरली सुनाकर सम्मुख आकर मुरली सुनाकर हमको अपना बना लिया देह और देह की दुनियां से पल भर में मुक्त कर दिया अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया नजरों से बाबा निहाल करके शक्तियों से श्रृंगार करते है नजरों से बाबा निहाल करके शक्तियों से श्रृंगार करते है पंख लगाए उमंगों के वो वतन में उड़ाते है मीठे मीठे बच्चे कहकर बाबा मीठे मीठे बच्चे कहकर बाबा आनंद ही आनंद भर दिया देह और देह की दुनियां से पल भर में मुक्त कर दिया अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया अपने स्नेह के आंचल में बाबा ने हमको समा लिया"