

अपनी पवित्र मूरत ज्योति सा जगमगाए व्यक्तित्व है रूहानी भगवान महिमा गाए सारे कल्प में भी ऊंची है शान अपनी सब से न्यारी प्यारी पहचान है अपनी इस स्मृतिस्वरूप से माया को भगाएं अपनी पवित्र मूरत ज्योति सा जगमगाए व्यक्तित्व है रूहानी भगवान महिमा गाए परमधाम में अपनी चमक ही सबसे दैदीप्यमान है सतयुग आदि में अपना जीवन सुख शांति की खान है सुख शांति की खान है मध्य काल में भी हम गाए पूजे जाये संगमयुग में भी बाबा हमे गुणों से सजाए अपनी पवित्र मूरत ज्योति सा जगमगाए व्यक्तित्व है रूहानी भगवान महिमा गाए अप्राप्त नहीं कोई वस्तु हम बच्चो के खजानो में सत्यता और स्वच्छता है जीवन के हर कोने में बाबा का कहना अशरीरी बन जाए अंतिम समय में हमको यह स्थिति कम आए अपनी पवित्र मूरत ज्योति सा जगमगाए व्यक्तित्व है रूहानी भगवान महिमा गाए सारे कल्प में भी ऊंची है शान अपनी सब से न्यारी प्यारी पहचान है अपनी इस स्मृतिस्वरूप से माया को भगाएं अपनी पवित्र मूरत ज्योति सा जगमगाए व्यक्तित्व है रूहानी भगवान महिमा गाए