"अरे आत्मा तू उड़ जा रे तुम्हें बाबा बुलाते हैं
अरे आत्मा तू उड़ जा रे तुम्हें बाबा बुलाते हैं
फरिश्ता बनके जाओ तुम
फरिश्ता बनके जाओ तुम
बाबा की गोद में बैठो
अतींद्रिय सुख में झूलो रे तुम्हें बाबा बुलाते हैं
मगन हो बातें करना रे तुम्हें बाबा बुलाते हैं
तुम ही तो देव आत्मा थे शांति धाम से आए थे
समय की धारा में बहते तुम माया में समाए थे
फिर ब्राह्मण बनके तुम्हीं ने मन को मंजिल दिखलाई
मन को मंजिल दिखलाई
पांचो स्वरूप को देखो रे सुदर्शन चक्र फिराओ रे
देह के पिंजड़े को छोड़ो गगन में मुक्त होके उड़ा
प्रभु से प्रीत तुम जोड़ो जंजीर माया की तोड़ो
जग को वतन से देखो रे
बैरागी मन हर्षाता हे
बैरागी मन हर्षाता हे
लेकर के किरणे बाबा से सुख शांति फैलाओ रे
खुदा के खिदमतगार हो तुम जग कल्याण करना है
देवी देवताओ का फिर से नया इतिहास रचना है
भारत को स्वर्ग बनाना ये कलयुग ठुकराना है
ये कलयुग ठुकराना है
सदा मन खुशियों में झूमे रे
ऐसा अब रास रचाना है
अरे आत्मा तू उड़ जा रे तुम्हें बाबा बुलाते हैं
फरिश्ता बनके जोओ तुम
बाबा की गोद में बैठो
अतींद्रिय सुख में झूलो रे तुम्हें बाबा बुलाते हैं
मगन हो बातें करना रे तुम्हें बाबा बुलाते हैं
अरे आत्मा तू उड़ जा रे
तुम्हें बाबा बुलाते हैं
तुम्हें बाबा बुलाते हैं
तुम्हें बाबा बुलाते हैं"
