अरे शिव की याद रहेगी तब
आंखों में समाया वो होगा
हम धन्य तभी बन पाएंगे
जब ऐसा प्रिय जीवन होगा
यहा हमारा
यहा हमारा
तन होगा
तन होगा
वहा हमारा
वहा हमारा
मन होगा
मन होगा
जहां होता है मानव का धन वही होता है उसका मन
इसलिए परमात्माने बताया मुझसे लगालो अपना मन हमसा नहीं कोई जमानेमें रचना रचता का ज्ञान जिसे
पर ऐसा भी बनना होगा नहीं कभी अभिमान जिसे
यहा हमारा
यहा हमारा
तन होगा
तन होगा
वहा हमारा
वहा हमारा
मन होगा
मन होगा
ये दुनिया तो मायावी है
माया से भला कैसी यारी
अपने तो दो ही ठिकाने है वैकुंठ दुनिया निरकारी
धुंधला सा अंधियारा है दीपक से उजियारा होगा
ये आंखभी तनका दीपक है ये ज्ञान जीवन दीपक होगा
यहा हमारा
यहा हमारा
तन होगा
तन होगा
वहा हमारा
वहा हमारा
मन होगा
मन होगा
अरे शिव की याद रहेगी तब
आंखों में समाया वो होगा
हम धन्य तभी बन पाएंगे
जब ऐसा प्रिय जीवन होगा
यहा हमारा
यहा हमारा
तन होगा
तन होगा
वहा हमारा
वहा हमारा
मन होगा
मन होगा
