

व्यक्त भाव से न्यारे अव्यक्त बाप के प्यारे अव्यक्त मूर्त अपनी है पहचान बाबा के सपूत है हम स्नेह का सबूत दे हम बनकर के बाबा समान बाबा समान बनने का ही लक्ष्य धरे जैसा लक्ष्य वैसा ही लक्षण धारण करे सदा अव्यक्त मिलन में ही हो मगन अव्यक्त मूर्त अपनी है पहचान बाबा के सपूत हम स्नेह का सबूत दे हम बनकर के बाबा समान हिम्मत हो जितनी मदद मिले उतनी सर्व की भी दुवाएं मिले सदा सदा हो संपन्न अपनी लगन में मगन बाबा जैसा साथी पाने सदा साथी और साथ का अनुभव हो न्यारा प्यारा और साक्षी भाव हो साथी बाबा से अनुभव हो नया हो ब्रम्हा बाबा जैसे जीवन व्यक्त भाव से न्यारे अव्यक्त बाप के प्यारे अव्यक्त मूर्त अपनी है पहचान दान दो गुणों का सर्व शक्तियों का सच्ची सेवा का यही सार है सदा हो सदभावना यही सच्ची धारणा अव्यक्त स्थिति का यही आधार है श्रेष्ठ भाव ही धारण हो सर्व के लिए समीप मनका बनके माला में पिरोए शुभ भाव ही सेवा भावना में जमा हो जाए मनसा सेवा का श्रेष्ठ ये साधन व्यक्त भाव से न्यारे अव्यक्त बाप के प्यारे अव्यक्त मूर्त अपनी है पहचान अव्यक्त मूर्त अपनी है पहचान अव्यक्त मूर्त अपनी है पहचान