

करनहार हु मैं आत्मा कर्मेंद्रियों की मालिक हु बाबा है करावनहार मै उनका बालक हु कर्मातीत बनने का मूल यही है आधार मेरे मन वीना के तार गा रहे यही उदगार बाबा है करावनहार मै आत्मा हु करनहार कर्मबंधन से अतीत कर्मातीत बनना है मन बुद्धि संस्कार को अपने वश में रखना है सेवा और पुरुषार्थ में संतुलन से करे सुधार मेरे मन वीना के तार गा रहे यही उदगार बाबा है करावनहार मै आत्मा हु करनहार अपने मन को चलाने वाली मै आत्मा हु न्यारी कर्मेंद्रियां है कर्मचारी मै आत्मा अधिकारी करानेवाला करा रहा इसी स्मृति से होंगे पार मेरे मन वीना के तार गा रहे यही उदगार बाबा है करावनहार मै आत्मा हु करनहार हम है दाता के बच्चे सदा ही देते रहना है रहमदिल बनकर के ही सेवा को बढ़ाना है स्थापना हो संपन्न बदले हम ये संसार मेरे मन वीना के तार गा रहे यही उदगार बाबा है करावनहार मै आत्मा हु करनहार करनहार हु मैं आत्मा कर्मेंद्रियों की मालिक हु बाबा है करावनहार मै उनका बालक हु कर्मातीत बनने का मूल यही आधार मेरे मन वीना के तार गा रहे यही उदगार बाबा है करावनहार मै आत्मा हु करनहार बाबा है करावनहार मै आत्मा हु करनहार