बाबा हमें पुरुषोत्तम बना रहे हैं।
पुरुषोत्तम बनाने पढ़ा रहे हैं।
सबसे उत्तम पुरुष देवताएँ हैं।
बाबा हमें देवता बना रहे हैं।
देह और देह के संबंध हम भूले,
आत्म-अभिमानी की मेहनत अब कर ले।
सतयुग में इस मेहनत से मुक्त होंगे,
बैठे-बैठे यूँ ही शरीर छोड़ देंगे।
यही अभ्यास हमसे करा रहे हैं।
बाबा हमें देवता बना रहे हैं।
ब्रह्मा बाबा ने सर्वस्व किया समर्पण,
उनके ही कदमों पर रखें हम कदम।
एक बाबा सिवाय कोई याद न आए,
याद से ही विजय माला में हम पिरोएँ।
21 जन्मों की बादशाही दे रहे हैं।
बाबा हमें देवता बना रहे हैं।
अब अपनी मनसा का रखना है ध्यान,
संकल्पों की हलचल को देना विराम।
कर्मयोग का अनुभव अब सदा करना,
कर्मयोगी बनकर सदा रहना।
चढ़ती कला में ले जा रहे हैं।
बाबा हमें देवता बना रहे हैं।
