बाबा के स्नेह में हम लवलीन रहें
बाबा के स्नेह में हम लवलीन रहें
दिलाराम के दिल तख्तनशीन रहें
स्नेह को स्नेही भूलता नहीं स्नेही ही को भूलना मुमकिन है
बाबा के स्नेह में हम लवलीन रहें
दिलाराम के दिल तख्तनशीन रहें
ज्ञानी तू हम आत्मा बच्चें दिलाराम के दिल के सच्चे
बाबा खड़े है बांहे पसारे हम बच्चों की राह निहारे
बाबा की बाहों में समाए मीठी मीठी छांव में आए
प्रभु स्नेह की जादू बड़ी है पर्वत को भी बना दे रुई
ज्ञान तो है बीज प्रेम है पानी प्रेम से भरी हो ये जिंदगानी
बाबा के स्नेह में हम लवलीन रहें
दिलाराम के दिल तख्तनशीन रहें
दिल से मेरा बाबा बोले सर्व खजानों के द्वार ये खोले
खुदा दोस्त से हो गई यारी पार हो गई समस्याएं सारी
बाप समान हमें बनना ही है तूफानों से डरना नहीं है
वरदाता का हाथ है सिर पे तूफान भी अब बन गए तोहफे
दृढ़ता से जो आगे बढ़ता हर हालत में मिले सफलता
मेहनत को मोहब्बत में बदले मोहब्बत में ही जीवन जी ले
बाबा के स्नेह में हम लवलीन रहें
दिलाराम के दिल तख्तनशीन रहें
शुभ चिंतक बन करें शुभ चिंतन शुभ वृत्ति से फैलाए सुगंध
कमजोर को भी सहयोग देना परवश का भी सहारा बनना
चारों और भय है फैला
जैसे दुखों का लगा है मेला
आओ हम करें ये प्रतिज्ञा विश्व का परिवर्तन होगा
सेवा स्थान हो अपना ऐसा चैतन्य में हो मंदिर जैसा
इस दर पे कोई भी आए खाली हाथ वो ना जा पाए
गुण शक्ति की सौगात बांटे देही दान तो ग्रहण भी छूटे
देने से कभी कम नहीं होगा अविनाशी धन और बढ़ेगा
बाबा के स्नेह में हम लवलीन रहें
दिलाराम के दिल तख्तनशीन रहें
