

"यह कलकत्ता गद्दी पुरानी यहाँ शुरू हुई इस यज्ञ की कहानी पिताश्री ब्रह्मा हाथों तस्वीर रूहानी जहाँ पर्दा देने सवारी है लाखों ज़िंदगानी है बाबा की आशओं तस्वीर रूहानी है करते रहे पूरी हर आज्ञा हमने ठानी है बाबा की आशओं तस्वीर रूहानी है करते रहे पूरी हर आज्ञा हमने ठानी है बड़े के आशीषों की यह तो मेहेरबानी है मीठे सुरों की सरगम सबको सुनानी है इसे सिल्वर जुबिली कहेकर के हमको मनानी है यह बांगुर दादी के हाथों बोया नन्हा पौधा सीचा परदादी ने सिखाया खुश रहना सदा आओ संभाले किससे सजांयें उनकी निशानी है करते रहे पूरी हर आशा हमने ठानी है इसे सिल्वर जुबिली कहेकर के हमको मनानी है आप सभी ने दुआयें दे और प्यार से की सेवा दादियोनें तपस्या की पाएं हम सब मेवा आप सभी ने दुआयें दे और प्यार से की सेवा दादियोनें तपस्या की पाएं हम सब मेवा बाप से पाया प्यार इतना शुक्रिया माननी है दादी आपसे पाया प्यार इतना शुक्रिया माननी है करते रहे पूरी हर आशा हमने ठानी है इसे सिल्वर जुबिली कहेकर के हमको मनानी है ज्ञान सूर्योदय का तीर्थ गंगा सागर यहाँ प्रत्यक्षता का सूर्य भी होगा उजागर यहाँ ज्ञान सूर्योदय का तीर्थ गंगा सागर यहाँ प्रत्यक्षता का सूर्य भी होगा उजागर यहाँ लकी लाल हम लकी बाप की गद्दी यह पुरानी है करते रहे पूरी हर आशा हमने ठानी है इसे सिल्वर जुबिली कहेकर के हमको मनानी है बाबा की आशओं तस्वीर रूहानी है करते रहे पूरी हर आज्ञा हमने ठानी है बड़े के आशीषों की यह तो मेहेरबानी है मीठे सुरों की सरगम सबको सुनानी है इसे सिल्वर जुबिली कहेकर के हमको मनानी है इसे सिल्वर जुबिली कहेकर के हमको मनानी है"