

मै जो हु जैसा हु बाबा पर मै आपका हु मै जो हु जैसा हु बाबा पर मै आपका हु भावनाओं के जाल में कभी कभी उलझ जाता हु माया की आंधियों में संकल्पों से डगमगाता हु बाबा पर मै आपका हु बाबा पर मै आपका हु मन की कमजोरी में आत्मा को भूल जाता हु भूतकाल की गलियों में पछतावे में गिर जाता हु बाबा पर मै आपका हु बाबा पर मै आपका हु मै जो हु जैसा हु बाबा पर मै आपका हु मै जो हु जैसा हु बाबा पर मै आपका हु जीवन के राहो में बार बार भटकता हु विघ्नों से हार खाता और उदास होता हु बाबा पर मै आपका हु बाबा पर मै आपका हु मै जो हु जैसा हु बाबा पर मै आपका हु मै जो हु जैसा हु बाबा पर मै आपका हु संगत की छाया में पुरानी आदतें उभर आती है आपके याद के बिना एक पल भी अधूरा हु बाबा पर मै आपका हु बाबा पर मै आपका हु मै जो हु जैसा हु बाबा पर मै आपका हु मै जो हु जैसा हु बाबा पर मै आपका हु