बाबा मिल गए, सब कुछ मिल गया,
सर्व खजानों की खान मिल गई।
भाग्य विधाता अपना हो गया,
हमको तो सारा जहान मिला।
वाह-वाह! हम कितने भाग्यवान है बने,
एक के द्वारा हमको तीनों रूप मिले।
बाप, शिक्षक, सतगुरु — ये तीनों रूप मिले।
जीवन बगिया में खुशियों के फूल है खिलें।
बालक सो हम मालिक बन गए,
स्व-राज्य से अपना विश्व-राज्य ले रहे।
न कोई चिंता, न व्यर्थ चिंतन,
बेफिक्र बादशाह बन गया जीवन।
अनुभवी मूर्त बनकर हम आगे बढ़ चले,
माया को जीतकर हम विजयी बन चले।
जीवन बगिया में खुशियों के फूल है खिलें।
स्मृति में सदा ही ज्ञान का नशा हो,
चेहरे और चलन से सभी को दिखाओ।
जो भी सामने आए, देखे ये नज़ारा,
इष्ट देव का दीदार हो हमारे द्वारा।
ब्रह्मा बाबा समान अब हम खुद को बदलें,
अव्यक्त फरिश्ता स्वरूप को पाले।
जीवन बगिया में खुशियों के फूल है खिलें।
