"बाबा मुझे अपने मधुबन में बुला लो
गोद में बिठा लो ,बाहों में छुपा लो
बाबा मुझे अपने मधुबन में बुला लो
गोद में बिठा लो बाहों में छुपा लो
मेरा यहां कोई नहीं ओ रे शिवा
तेरे सिवा कोई नहीं
बाबा मुझे अपने मधुबन में बुला लो
गोद में बिठा लो, बाहों में छुपा लो
ना यहां मेरा कोई है अपना
जल बिन मछली जैसा तड़पना
आओ बाबा मुझको संभालो
माया के चंगुल से मुझको निकालो
ओ मेरे बाबा मुझे गले से लगा लो
मेरा यहां कोई नहीं ओ रे शिवा
तेरे सिवा कोई नहीं
ओ बाबा मेरे तेरे सिवा कोई नहीं
ओ बाबा मेरे तेरे सिवा कोई नहीं
बाबा मुझे अपने मधुबन में बुला लो
गोद में बिठा लो बाहों में छुपा लो
गोद में तेरे अब तक पली हूं
सतयुग ,त्रेता श्रीमत पे चली हूं
द्वापर ,कलयुग तुमसे मैं बिछड़ गई
नईया मेरी भंवर में फंस गई
संगम पे आकर मुझको संभालो
मेरा यहां कोई नहीं ,ओ रे शिवा
तेरे सिवा कोई नहीं
ओ बाबा मेरे तेरे सिवा कोई नहीं
ओ बाबा मेरे तेरे सिवा कोई नहीं
बाबा मुझे अपने मधुबन में बुला लो
गोद में बिठा लो बाहों में छुपा लो
ज्ञान रत्नों से मेरा कर दो श्रृंगार
बाबा बरसा दो रूहानी प्यार
जाती हुई सांसे ,आते हुए पल
उंगली पकड़ के मुझे ले चल
दुर्योधन, दुशासनो से बचा लो
मेरा यहां कोई नहीं ओ रे शिवा
तेरे सिवा कोई नहीं
ओ बाबा मेरे तेरे सिवा कोई नहीं
ओ बाबा मेरे तेरे सिवा कोई नहीं
बाबा मुझे अपने मधुबन में बुला लो
गोद में बिठा लो बाहों में छुपा लो
मधुबन में लगती फरिश्तों की झांकिया
शिव संग बैठी है प्यारी पर्वतीया
उनसे करते हो तुम मीठी प्यारी बतिया
उड़ती है नींद मेरी जागु सारी रतिया
यूं ही मेरी जान मेरे तन से ना निकालो
मेरा यहां कोई नहीं ओ रे शिवा
तेरे सिवा कोई नहीं
ओ बाबा मेरे तेरे सिवा कोई नहीं
ओ बाबा मेरे तेरे सिवा कोई नहीं
बाबा मुझे अपने मधुबन में बुला लो
गोद में बिठा लो बाहों में छुपा लो"
