

बाबा से मिलकर के किस्मत को जगाए है बाबा से मिलकर के किस्मत को जगाए है दिलतख्त दिया उसने नजरों में समाए है बाबा से मिलकर के किस्मत को जगाए है जब भटक रहें थे हम उसका दर्शन पाने जब भटक रहें थे हम उसका दर्शन पाने हर तरफ नजर फेरी कब कोई नहीं जाने शिव पिता ने प्यार किया बाहें फैलाए हैं बाबा से मिलकर के किस्मत को जगाए है जप तप सेवा सुमिरन कितनी अरदास किए जप तप सेवा सुमिरन कितनी अरदास किए सबकुछ तो किया मैने मिलने की आश लिए ब्रह्मा के तन में शिव अपने को झुकाए है बाबा से मिलकर के किस्मत को जगाए है मिलने का सुख पाया अब छोड़के ना जाना मिलने का सुख पाया अब छोड़के ना जाना संगम के सुहाने पल फिर संग है घर जाना मेरी दुनियां भूलकर मुझे दुनिया भुलाई है बाबा से मिलकर के किस्मत को जगाए है बाबा से मिलकर के किस्मत को जगाए है दिलतख्त दिया उसने नजरों में समाए है दिलतख्त दिया उसने नजरों में समाए है