"बाबा तेरी दृष्टि की किरणे सारी सृष्टि को सजाती है
मधुबन के खिलते फूलों से तेरी ही सदाये आती है
बाबा एक माला के मोती है
एक एक मोती दिव्य ज्योति है
इस ज्ञान के सिंधू में रहकर हमें दिव्य रतन बन जाना है
तेरी मुरली की सरगम ने बाबा हमको विदेही बनाया है
रूहानी मस्ती में ही रहना बाबा तुमने ही सिखाया है
तेरी आंखो में जब देखूं बाबा
एक बात सुनाई देती है
खो जाऊ तेरे ध्यान में बाबा
एक बिंदु दिखाई देती है
खो जाऊ तेरे ध्यान में बाबा
एक बिंदु दिखाई देती है
एक बिंदु दिखाई देती है
एक बिंदु दिखाई देती है
एक बिंदु दिखाई देती है
एक बिंदु दिखाई देती है"
