ाबा.. ते...री... स्नेह भरी दृष्टि से तृप्त हुआ... जग सारा ......
बाबा....ते...री....स्नेह भरी दृष्टि से तृप्त हुआ...जग सारा..
अधरों पे जैसे हमारे छलकाए अमृत धारा
बाबा...ते..री.. स्नेह भरी दृष्टि से तृप्त हुआ ...जग सारा..
बाबा....ते..री....
प्यासी धरती की प्यास बुझी, अम्बर की सब आस मिटी
दसों दिशाओं में जैसे की, खुशियों की शहनाई बजी
शीतल-शीतल चली हवाएं, नगमें गाए मौसम प्यारा आआआआ
नगमें गाए मौसम प्यारा आआ,
बाबा...ते..री...स्नेह भरी दृष्टि से तृप्त हुआ...जग सारा....
सातों सुरों की मधुर रागिनी, दिल के तारों में झलक उठे
मन के मानसरोवर में, स्नेह के नीर छलक उठे
किरन-किरन आकर मन के, किरन-किरन आकर मन के
हरता गम का अंधियारा, हरता गम का अंधियारा
बाबा....ते...री... स्नेह भरी दृष्टि से तृप्त हुआ जग सारा ....
बाबा....ते....री....स्नेह भरी दृष्टि से तृप्त हुआ जग सारा....
अधरों पे जैसे हमारे छलकाए, अमृत धारा....
बाबा... ते...री....स्नेह भरी दृष्टि से, तृप्त हुआ जग सारा.......
बाबा....ते..री...स्नेह भरी दृष्टि से, तृप्त हुआ जग सारा.....
