“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा
फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो''
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बने मालिक अपने मन के हम इसे अपने वश में रखना है ।
हमें एकाग्रता की शक्ति से ही फरिश्ता स्थिति को पाना है ।
बने मालिक अपने मन के हम ... ।
ज्ञान गुण और शक्तियों के बाबा से मिले है ये खजाने ।
बड़ी अनमोल है दिल की दुआएँ , संगमयुग पर पाई हमने ।
नयनों से अपने हमें औरों को भी अनुभव खुशी का कराना है ।
हमें एकाग्रता की शक्ति से ही फरिश्ता स्थिति को पाना है ।
बने मालिक अपने मन के हम ... ।
मन जीते जगजीत बनेंगे , व्यर्थ में मन को ना भटकाये ।
मन की लगन प्रभु से लगाए , एक के रस में ही खो जाए ।
एक बाबा दूजा ना कोई ईसी अनुभूति में रहना है ।
हमें एकाग्रता की शक्ति से ही फरिश्ता स्थिति को पाना है ।
बने मालिक अपने मन के हम ... ।
दृष्टि वृति हर कर्म अलौकीक, दहभान से मुक्त हो न्यारा ।
सूक्ष्म प्रकाशमय कायाधारी, ब्रह्मा बाबा जैसा हो प्यारा।
अब बनके फरिश्ता हम सब को भी अपने घर को जाना है ।
हमें एकाग्रता की शक्ति से ही फरिश्ता स्थिति को पाना है ।
बने मालिक अपने मन के हम ... ।
