

“मन को एकाग्र कर, एकाग्रता की शक्ति द्वारा फरिश्ता स्थिति का अनुभव करो'' =========================================== बने मालिक अपने मन के हम इसे अपने वश में रखना है । हमें एकाग्रता की शक्ति से ही फरिश्ता स्थिति को पाना है । बने मालिक अपने मन के हम ... । ज्ञान गुण और शक्तियों के बाबा से मिले है ये खजाने । बड़ी अनमोल है दिल की दुआएँ , संगमयुग पर पाई हमने । नयनों से अपने हमें औरों को भी अनुभव खुशी का कराना है । हमें एकाग्रता की शक्ति से ही फरिश्ता स्थिति को पाना है । बने मालिक अपने मन के हम ... । मन जीते जगजीत बनेंगे , व्यर्थ में मन को ना भटकाये । मन की लगन प्रभु से लगाए , एक के रस में ही खो जाए । एक बाबा दूजा ना कोई ईसी अनुभूति में रहना है । हमें एकाग्रता की शक्ति से ही फरिश्ता स्थिति को पाना है । बने मालिक अपने मन के हम ... । दृष्टि वृति हर कर्म अलौकीक, दहभान से मुक्त हो न्यारा । सूक्ष्म प्रकाशमय कायाधारी, ब्रह्मा बाबा जैसा हो प्यारा। अब बनके फरिश्ता हम सब को भी अपने घर को जाना है । हमें एकाग्रता की शक्ति से ही फरिश्ता स्थिति को पाना है । बने मालिक अपने मन के हम ... ।