

बनकर के हम स्व-उपकारी, अपकारी पर करें उपकार। स्वमान में रहकर सबको सम्मान का दें उपहार। परमात्मा का स्नेह पाकर, अपना दिल खुशहाल हुआ। सर्व शक्तियों का वरसा ले, जीवन मालामाल हुआ। प्रभु स्नेह और सर्व शक्तियाँ, दोनों मिले एक समान। जब चाहें उसे कार्य में लाएँ, बाबा का है ये फरमान। श्रीमत पर जो हाजिर-हुजूर, उसे ही मिलता ये अधिकार। स्वमान में रहकर सबको सम्मान का दें उपहार। प्रभु स्नेह का बीज हमें, अब हर दिल में बोना है। सबको सच्चा मान देकर, माननीय बन जाना है। सर्व गुणों से सम्पन्न बनने का भी आधार यही। दुआओं का भंडार वो पाए, जो देता सम्मान सही। सम्मान के अब दाता बनना, समय की है यही पुकार। स्वमान में रहकर सबको सम्मान का दें उपहार। बनकर हम स्व-उपकारी, अपकारी पर करें उपकार। स्वमान में रहकर सबको सम्मान का दें उपहार।