बेहद के बाप का यह बेहद का परिवार विश्व के कोने-कोने में फैला हुआ है, फिर भी सबकी दिनचर्या एक जैसी और दृष्टिकोण बेहद का है। सबकी लगन एक ही है—बेहद के बाप से मिलन मनाना। सब कुछ बेहद है। हमें नशा होना चाहिए कि मैं भी ऐसे बेहद के परिवार का एक हिस्सा हूँ।
इस ईश्वरीय बगीचे का हर फूल बाबा के गले के हार में पिरोया हुआ है और कल्प-कल्प पिरोता रहता है। जब ऐसा संकल्प और स्थिति बनती है, तब हम बाप समान बेहद की स्थिति में स्थित होते हैं।
बेहद बाप का दिल सदा बेहद का है। मधुबन हमारा बेहद का घर है, जहाँ सच्ची शांति और सुख का अनुभव होता है। मधुबन में रहकर हमारी आत्मिक स्थिति भी बेहद की बनती है।
बाबा ने हमारा दृष्टिकोण पक्का कराया है कि विश्व की सभी आत्माएँ बाबा के बच्चे हैं, अर्थात हमारे भाई-बहन हैं। कोई ज्ञान में है, कोई नहीं है, फिर भी सभी भाग्यशाली हैं। ऐसी भावना रखने से बेहद का दृष्टिकोण बनता है। बेहद के दिल में सबके लिए प्यार रहता है और बेहद की सेवा होती है।
विश्व की अनेक आत्माएँ सच्चे भगवान को पाने के लिए भटक रही हैं। उन्हें बाबा का संदेश सुनाकर बेहद की सेवा करना भी बेहद की सोच है। इसी भावना से बड़े-बड़े कार्यक्रम होते हैं और लोग हमारी सुंदर व्यवस्था देखकर आश्चर्य करते हैं।
बेहद की स्थिति बनाने के लिए बेहद की दृष्टि चाहिए। जितना बेहद की स्थिति में स्थित रहेंगे, उतना अतीन्द्रिय सुख सदा अनुभव करेंगे। इसका पहला आधार है बेहद की स्मृति, फिर बेहद की दृष्टि। स्थान, बेहद का ज्ञान और बेहद के संगठन में सम्मिलित होना—ये सब हमारी स्थिति और भाग्य को बढ़ाते हैं।
विश्व में सतयुगी दुनिया लाने के लिए यह बेहद की स्थिति बहुत आवश्यक है। बेहद की प्राप्ति का अनुभव और कहीं नहीं मिल सकता। यह ज्ञानमार्ग ही बेहद का मार्ग है, जो हमें 21 जन्मों की प्रालब्ध देता है।
