

भगवान पालनहार अपना वही है जन्मदाता। शिक्षक सतगुरु भी वही, वही है भाग्यविधाता। भाग्यविधाता ही अपना हो गया। निश्चय और नशा है श्रेष्ठ जन्म मिल गया। प्राप्तियों से जीवन उपवन खिल गया। सर्व संबंधों से बाबा को अपना लिया। प्राप्तियों से जीवन उपवन खिल गया। मिली है ऐसी पढ़ाई, त्रिकालदर्शी हमें बनाने वाली। अब यहाँ स्वराज्य पद देकर, भविष्य राज्य पद भी हमें दिलाने वाली। श्रीमत से पद्मों की कमाई हो रही। सतगुरु से वरदानों का खजाना मिल गया। मेहनत से मुक्त हुए, सब आसान हो गया। सर्व संबंधों से बाबा को अपना लिया। प्राप्तियों से जीवन उपवन खिल गया। अपनी मुख की बोली, हर कर्म भी अलौकिक न्यारा हो। चेहरा और चलन भी दर्शनीय मूर्त रूहानी प्यारा हो। बाबा की प्रत्यक्षता का है यह आधार। साधारणता को हमने अलौकिकता में बदल दिया। दिव्यता से खुद को मालामाल कर दिया। सर्व संबंधों से बाबा को अपना लिया। प्राप्तियों से जीवन उपवन खिल गया। हम हैं बाबा की रचना, देखेगी यह सारी दुनिया। इस रचना के रचयिता को ढूंढेगी सारी दुनिया। भाषण से नहीं, भासना से बाबा प्रत्यक्ष होंगे। हम बाबा के बच्चे जब दर्शनीय मूर्त होंगे। भाग्यविधाता ही अपना हो गया। निश्चय और नशा है श्रेष्ठ जन्म मिल गया। प्राप्तियों से जीवन उपवन खिल गया। सर्व संबंधों से बाबा को अपना लिया। प्राप्तियों से जीवन उपवन खिल गया।