मुखड़
भाग्य विधाता पिता हमारे, हम कितने हैं भाग्यवान
सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न, अपना जीवन है महान
भाग्य विधाता पिता हमारे, हम कितने हैं भाग्यवान
अंतरा – 1
एक बाबा में ही तीनों रूप पाए
बाप, टीचर, सद्गुरु तीनों बाबा में ही समाए
बाप से वर्सा मिला, शिक्षक से मिली पढ़ाई
सद्गुरु की श्रीमत से जीवन श्रेष्ठ बनाई
सतयुगी राज्य भाग्य हो गया अपने नाम
सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न, अपना जीवन है महान
भाग्य विधाता पिता हमारे, हम कितने हैं भाग्यवान
अंतरा – 2
बालक सो मालिक बन, शक्तियाँ पानी हैं
शक्तियों को समय पर कार्य में लगानी हैं
संगमयुग का समय, संकल्प हैं अनमोल
बाबा संग घर जाना है, व्यर्थ न हो कोई पल
तीव्र पुरुषार्थ से बनना है बाप समान
सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न, अपना जीवन है महान
भाग्य विधाता पिता हमारे, हम कितने हैं भाग्यवान
अंतरा – 3
ज्ञान स्वरूप शक्ति स्वरूप अनुभवी मूर्त बनना.
अमृतवेले अनुभव की शक्ति को बढ़ाना
शक्तिशाली हो स्थिति , प्रकाशमय फ़रिश्ता
मन के मनन से होगी , मन की एकाग्रता
योग की सकाश से, शक्ति शाली हो जहान
सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न, अपना जीवन है महान
भाग्य विधाता पिता हमारे, हम कितने हैं भाग्यवान
