

Chorus भाई -भाई की वृत्ति धारण करें , पवित्रता की धारणा का आधार । पवित्रता ही जीवन का सार, जीवन में लाए बहार । कहते जिसे असंभव है सभी , वही अपना स्वधर्म है अपना शृंगार । पवित्रता ही जीवन का सार, जीवन में लाए बहार । Verse 1 हर आत्मा प्रति हो सदा, शुभ भावना शुभ कामना । आत्म स्वरूप में ही सदा, हर आत्मा को देखना । पवित्र आत्मायें , दुआओं से जिये , परमात्म प्यार में उड़ते-उड़ाते रहे । रूहानी नशा सदा, अतीन्द्रिय सुख है फल,पवित्रता का है बल, जीवन हुई सफल । प्रभु और प्रभु परिवार का प्यार , हम बच्चों पर बरस रहा है सदा अपार । पवित्रता ही जीवन का सार, जीवन में लाए बहार । Verse 2 पवित्रता का व्रत है लिया, दृष्टि वृत्ति बदल गई । शक्तिशाली हो सदा , मन वचन कर्म और स्वप्न भी । विश्व परिवर्तक , कल्याणकारी अपकारी पर भी बनना है उपकारी । समय की है पुकार , दुखियों की सुन पुकार , सुख शांति देकर, करें उनका उद्धार योगी भव और पवित्र भव, यही वरदान को जीवन में उतार । पवित्रता ही जीवन का सार, जीवन में लाए बहार । कहते जिसे असंभव है सभी , वही अपना स्वधर्म है अपना शृंगार । पवित्रता ही जीवन का सार, जीवन में लाए बहार ।