भक्ति और ज्ञान में अंतर है। भगवान को याद करना भक्ति है, लेकिन समझ के साथ याद करना ज्ञान है। ज्ञान बिना सद्गति नहीं मिलती।
भगवान को यथार्थ रूप से जानकर और वैसे ही याद करने से शक्ति और प्राप्तियाँ मिलती हैं। परमात्मा हमें अपना और आत्मा का सही परिचय देते हैं और कहते हैं — “मन मेरे में लगाओ।”
परमात्मा ज्ञान का सागर है। वे कर्म नहीं करते, कर्म हम करते हैं और फल भी हम ही भोगते हैं। उनकी शिक्षा को धारण करने से आत्मा पवित्र बनती है और प्रारब्ध श्रेष्ठ बनती है।
योग और ज्ञान साथ-साथ चलते हैं। योग-अग्नि से जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और आत्मा को शक्ति मिलती है।
परमात्मा सतगुरु, जानी-जाननहार और सबकी सद्गति करने वाले हैं। उनकी निरंतर याद से बल मिलता है, कर्म श्रेष्ठ बनते हैं और भाग्य सुधरता है।
भक्ति से अल्पकाल का फल मिलता है, लेकिन ज्ञान से स्थायी सुख और शांति मिलती है। आज के समय में ज्ञान, योग और धारणा से ही सच्चा परिवर्तन आता है और हम अपना श्रेष्ठ अधिकार प्राप्त कर सकते हैं।
