"भूमण्डल पर स्वर्ग रचाने आया रचनाकार- रचनाकार
रूप विचित्र, रंग निराला, अनोखा चित्रकार चित्रकार
ज्योतिबिन्दु, स्नेह- सिन्धु प्रेम सुधा रस बरसाये
ज्ञान की मुरली सुनाये जब वो, अन्तर्मन हर्षाये
आप समान बनाने आया, परम है वो शिव पुकार
रूप विचित्र, रंग निराला, अनोखा चित्रकार चित्रकार....
कल्प-कल्प के संगमयुग में परिवर्तन की बेला में
उपकार किया है रूहों पर महामिलन की बेला में
पावन करने सारे सृष्टि का लिए ब्रह्मा तन आधार
रूप विचित्र, रंग निराला, अनोखा चित्रकार चित्रकार....
राजयोग का योग सिखाने योगेश्वर शिव आये हैं
बेहद वर्षा आँखों में ले स्वर्ग सौगात लाये हैं
भक्तों की पुकार सुनकर संगम पर हुए फिर साकार
रूप विचित्र, रंग निराला, अनोखा चित्रकार चित्रकार...."
