

- बाबा की दिनचर्या अपनी पर्सनल थी, किन्तु मधुबन की भी बाबा ने एक दिनचर्या बनायी थी जो नीचे बताए अनुसार है (निर्वैर भाई क्लासेस) - यज्ञ में बाबा, मम्मा, वरिष्ठ भाई और बहनें अपने हिसाब से अमृतवेला करते थे, किन्तु यज्ञ में कोई जनरल मेडिटेशन का प्रोग्राम होता नहीं था। - 1962 में होली के शुभ दिवस पर हिस्ट्री हॉल का उद्घाटन हुआ, उसके बाद यज्ञ में जनरल मेडीटेशन के प्रोग्राम की श्रृंखला शुरू हुई। - सुबह 4:15 से 4:45 का कलेक्टिव मेडिटेशन प्रोग्राम होता था जिसमें मम्मा एवं बाबा सभी यज्ञ वत्सों को एक-एक को दृष्टि देते थे। अगर मम्मा न हों तो बाबा सभी भाई-बहनों को दृष्टि देते थे। - उन दिनों में मुरली क्लास गर्मी के सीजन में सुबह 6 बजे होती थी, और ठंडी के सीजन में सुबह 6:30 पर होती थी। - 6 से 6:15 मम्मा सभी वत्सों को योग की गहन अनुभूति करवाती थीं। - 6:15 से 6:30 बजे तक मम्मा का प्रवचन और ज्ञान का चिंतन और मुरली चलती थी। - 6:30 को अक्षर करके बाबा मुरली चलाने के लिए आते थे, और बाबा के कदमों की आवाज़ सुनकर मम्मा अपने क्लास को विराम देती थीं। - 6:30 से 6:33 तक कुछ 3 से 5 मिनट तक बाबा ग्रामोफोन बजवाते थे, जो पुराने मुरली के गीत होते थे जो आज हम सुनते हैं। - फिर बाबा की मुरली शुरू होती थी, और वह मुरली सिर्फ यज्ञ वत्स ही नहीं बल्कि सारे विश्व के लिए चलती थी। - मुरली पहले बाबा सुनाते थे, फिर इशू दादी शॉर्ट-हैंड से लिखती थीं, उसके पश्चात उसका हिंदी में भाषांतरण होता था। फिर लिथोग्राफी द्वारा मुरली की प्रिंट होती थी, फिर सभी अलग-अलग सेवा केंद्रों में पोस्ट द्वारा पहुँचाई जाती थी। - मुरली के पश्चात, मम्मा का कमरा जिसे चेम्बर रूम कहा जाता था, वहाँ कुछ भाई-बहनें, मम्मा और बाबा इकट्ठे होते थे; इस दौरान कोई भाई कविता, कोई गीत सुनाता था, और बाबा और मम्मा सभी बच्चों को टोली खिलाते थे। - उसके पश्चात बाबा पत्रों के जवाब का सारा काम देखते थे, जिसमें सभी दादियों को पत्र का जवाब देना होता था। बाबा की पत्र लिखने की स्पीड बहुत बहुत तेज थी। जो भाई-बहनें सिंधी नहीं समझती थीं उनके लिए चन्द्रहास दादा और इशू दादी उन पत्रों में ऊपर हिंदी भाषा में अपने पॉइंट जोड़ते थे। - 10:00 बजे बाबा या तो झोपड़ी में जाकर थोड़ा विश्राम करते थे, या फिर यज्ञ में चक्कर लगाते थे। - बाबा ने पार्टी को एवं किसको क्या मिलता था — पर्सनल तो 11:30 से 12:15 का टाइम दिया हुआ होता था जिसमें सभी भाई-बहनें बाबा से मिलते थे और अपने प्रश्न एवं समाचार बाबा के सामने रखते थे, और बाबा उनके प्रश्नों का समाधान करते थे। - 12:15 को यज्ञ में भोजन के लिए बेल बजता था, जो बाबा का तन वृद्ध होने के कारण, बाबा चन्द्रहास दादा से शरीर की मसाज करवाते थे, फिर बाबा स्नान पानी करते थे। उसके पश्चात बाबा 1:30 को भोजन करते थे। - 01:30 को भोजन के पश्चात फिर एक बार यज्ञ में चक्कर लगाते थे। - भोजन के बाद बाबा कभी-कभी सभी आने वाले भाइयों को कहते थे कि जाकर मंदिरों में सेवा कर आओ। (उस समय टैक्सी, बस आदि कुछ नहीं था, सभी जगह पर चलकर ही जाना होता था। जब भी मधुबन में पार्टी आती थी तब भी सभी को बस स्टॉप पर रिसीव करने के लिए बेल गाड़ी आती थी जो सामान लेकर मधुबन जाती थी, किन्तु बच्चों को चलकर ही आना होता था।) - शाम को 5 से 6 बजे बाबा बेड-मिंटन बच्चों के साथ खेलते थे। - एक बाजू बाबा और उनके 2 साथी होते थे। - दूसरी बाजू मम्मा और उनके 2 साथी होते थे। - इस खेल में विचित्र बात यह होती थी कि, जो हार जाता था उसे डबल टोली मिलती थी ताकि वह दूसरी बार और अच्छे से खेले और जीते। - इस तरह से बाबा हर बात प्रैक्टिकल में बच्चों को अनुभव करवाते थे। (फैमिली पन, अपना पन, माता-पिता का प्यार) - कभी-कभी मम्मा भी बच्चों को कुल्फी पिकनिक पर ले जाती थीं या भेजती थीं… (मटके वाली कुल्फी) - रात को फिर सभी बच्चे इकट्ठे होते थे, - शुरू में मम्मा कुछ समय के लिए अपने विचार रखती थीं, या प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देती थीं, या दिनचर्या से सम्बंधित बातों में सवाल करती थीं, जैसे कि चार्ट कैसा रहा। - उसके बाद, जिनके पत्र आते थे, उन पत्रों को पढ़ने का एवं समाचार सुनने-सुनाने का काम, मम्मा के साथ रहने वाली जामना दादी का था। - अंत में या बीच में बाबा 15 मिनट के लिए आते थे और इस समय बाबा भी सभी बच्चों को एक परिवार की भावना देते थे, सभी को टोली खिलाते थे। - बाबा, गुरु की रीति से बिल्कुल भिन्न तरीके से बच्चों को अपने पास बिठाते थे और भाषण करने को कहते थे, जिससे उनमें बल भरे। - टोली देने की विधि भी बाबा की बहुत भिन्न थी; कभी-कभी बाबा टोली देने के लिए बहन को खड़ा करते और कहते भाई को टोली दो (लेकिन वह बहन दे जो कभी जीवन में रोई न हो) और भाई-बहनों को टोली दें (किंतु वह भाई जिसने जीवन में कभी गुस्सा न किया हो)। - उसके पश्चात यज्ञ की दिनचर्या समाप्त होती थी, सभी भाई-बहनों को दूध का ग्लास अवश्य मिलता था। Video Link - https://www.youtube.com/watch?v=2QdLQh_mxs8&t=886