ब्रह्मा बाबा की तस्वीर दिल में बसी,
यादों की माला से सजाते हैं।
मीठे बच्चे, यही बोल आज भी हमें, कानों में सुनाई देते हैं।
आत्मस्मृति का हमें है तिलक दे दिया,
पवित्रता का हमें ताज पहनाया।
सर्वशक्तियों का वरदान देकर के, ब्रह्मा बाबा ने हमें आगे बढ़ाया।
करनहार निमित्त बन कर्म हम करें, वो करावनहार बन कराते हैं।
मीठे बच्चे, यही बोल आज भी हमें, कानों में सुनाई देते हैं।
विश्व रचयिता की संतान हैं हम सभी,
यह स्मृति स्वरूप बन के रहना सदा।
संगम की प्राप्तियाँ हैं सर्वशक्तियां, अधिकार से कार्य में लाना सदा।
अब खुद को समर्थ हम बनाकर ही, सभी को समर्थ बनाते रहें।
मीठे बच्चे, यही बोल आज भी हमें, कानों में सुनाई देते हैं।
संकल्प भी न व्यर्थ जाए कभी,
व्यर्थ की आदतों को मिटाएँ अभी।
रोज स्वराज्य का दरबार लगाते रहें, वश में रखें हम कर्मेन्द्रियाँ सभी।
निराशा के अंधेरे में भटकें सभी, हम आशाओं के दीप जलाते रहें।
मीठे बच्चे, यही बोल आज भी हमें, रह-रह कर सुनाई देते हैं।
