

"आ .. आ .. चलो इस जहा से पार चले इस जहा से पार अपने वतन अपने वतन प्यारे शिवबाबा के पास हो के मगन हो के मगन हो के मगन हो के मगन चलो इस जहा से पार चले इस जहा से पार अपने वतन अपने वतन आत्म पंछी उड़ चले हैं अरमानों के पंख लगाएं आत्म पंछी उड़ चले हैं अरमानों के पंख लगाएं बड़ी सुहानी घड़ियां है ये बाबा हमको वतन बुलाए परमानंद की मस्ती में है परमानंद की मस्ती में है जब बाबा से लगी लगन चले इस जहां से पार चलो इस जहां से पार अपने वतन अपने वतन आ ... आ .. झिलमिल करती आत्म ज्योति चली प्रभु से मिलन मनाने झिलमिल करती आत्म ज्योति चली प्रभु से मिलन मनाने खुशबू रूहानी ले बाबा की चली परम ज्योति में समाने परमानंद की मस्ती में है परमानंद की मस्ती में है जब बाबा से लगी लगन चले इस जहां से पार चलो इस जहां से पार अपने वतन अपने वतन प्यारे शिवबाबा के पास हो के मगन हो के मगन हो के मगन हो के मगन चलो इस जहा से पार चले इस जहा से पार"