"आ...
चलो उड़ चले वतन की ओर
चलो उड़ चले वतन की ओर
छोड़कर के दुनिया का शोर
छोड़कर के दुनिया का शोर
चलो उड़ चले वतन की ओर
चलो उड़ चले वतन की ओर
जहां शिव शमा निराला है
दिलों का वो दिलवाला है
जहां शिव शमा निराला है
दिलों का वो दिलवाला है
वहां रूहानी रंगत में
नाचने लगता मन का मोर
चलो उड़ चले वतन की ओर
चलो उड़ चले वतन की ओर
आ...
वहां ना दिन है ना रातें
करें दिल की उनसे बातें
वहां ना दिन है ना राते
करें दिल की उनसे बातें
समर्पण उनके संगत में
झूमेंगे होकर भाव विभोर
चलो उड़ चले वतन की ओर
चलो उड़ चले वतन की ओर
देह दुनिया का ना कुछ भान
नहीं सुख दुख का कोई ज्ञान
देह दुनिया का ना कुछ भान
नहीं सुख-दुख का कोई ज्ञान
परम आनंद समाएगा
कहीं मिलता ना जिसका छोर
चलो उड़ चले वतन की ओर
चलो उड़ चले वतन की ओर"
