

चमक रही मस्तक में अपने भाग्य की ये तीन लकीरें प्रभू पालना और पढाई श्रीमत की है ये लकिरे प्रभु की पालना और पढ़ाई मेरी श्रेष्ठ श्रीमत पे उनके ये जीवन चले नहीं सोचा था सपने में भी ये कभी कर्म बंधन संबंध में बदले सभी सबसे श्रेष्ठ है अपनी पवित्रता अपने जैसा नहीं कोई देह और आत्मा पांच तत्व भी पावन होंगे सुखदाई पावन होंगे सुखदाई कृष्ण के संग रास रचाएंगे हम फूल बनकर महकें यहापर कही प्रभु की पालना और पढ़ाई मेरी श्रेष्ठ श्रीमत पे उनके ये जीवन चली बाबा अपने साथ है लाए नई दुनिया सौगात में अब घर जाके राज्य में आए रहे सदा इस याद में रहे सदा इस याद में आई की आई अपनी वो दुनिया नई खुशियों में झूमे घर आंगन व गली प्रभु की पालना और पढ़ाई मेरी श्रेष्ठ श्रीमत पे उनके ये जीवन चली व्यर्थ चिंतन व्यर्थ दर्शन व्यर्थ समय से मुक्त रहे निर्मलता और निर्माणता से सबसे दुवाएं प्राप्त करे सबसे दुवाएं प्राप्त करे वाणी से सबको संदेश देते चले अनुभूति से सबकी भरे झोली प्रभु की पालना और पढ़ाई मेरी श्रेष्ठ श्रीमत पे उनके ये जीवन चली चमक रही मस्तक में अपने भाग्य की ये तीन लकीरें प्रभू पालना और पढाई श्रीमत की है ये लकिरे प्रभु की पालना और पढ़ाई मेरी श्रेष्ठ श्रीमत पे उनके ये जीवन चली नहीं सोचा था सपने में भी कभी कर्म बंधन संबंध में बदले सभी