

चौरासी जन्मों का हुआ ये खेल पुराना है सतयुग से कलयुग का हुआ संगम सुहाना है सत्यम शिवम सुंदर को अब हमने जाना है शिव पिता .. प्रभु पिता लेने आए हमे अब घर जाना है शिव पिता लेने आए हमे अब घर जाना है लख चौरासी जीवोका जल थलमे आना जाना है हम आतम पंछियों का परमधाम ठिकाना है सूरज चांद तारो को सूरज चांद तारो को सूरज चांद तारो को हमे अपना बनाना है शिव पिता .. प्रभु पिता लेने आए हमे अब घर जाना है शिव पिता लेने आए हमे अब घर जाना है तन तीरथ मन मूरत है मेरा हर बच्चा भागीरथ है मानव को देव बनाना शिवपीता की जैसी सीरत है अपने कुल परिजनों…. को अपने कुल परिजनों …को भवसागर पार कराना है शिव पिता…. प्रभु पिता लेने आए हमे अब घर जाना है शिव पिता लेने आए हमे अब घर जाना है सुख शांति की ओढ़ा रहे वो पावन हमे चुनरिया माया मोह से दूर वो बनाये स्वर्ग नगरिया राधे कृष्ण के संग वहा… राधे कृष्ण के संग वहा… राधे कृष्ण के संग वहा हमे रास रचाना है शिव पिता…. प्रभु पिता लेने आए हमे अब घर जाना है शिव पिता लेने आए हमे अब घर जाना है शिव पिता लेने आए हमे अब घर जाना है शिव पिता लेने आए हमे अब घर जाना है _________________________