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"लालालाला लालालाला लालालाला लालालाला लालरला लालालाला लालालाला लालालाला लालालाला लालरला चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके,बच्चों को नशा चढाये चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके, बच्चों को नशा चढ़ायें बाबा और बच्चों का सम्बन्ध जुटाये 14 साल की भठ्ठी में बिठा के ज्ञान स्नान कराके बच्चों को श्रृंगारे बीते 75 साल कैसे समझ न पाये चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें सन् 37 की है बात, थी घोर पाप की रात ज्ञान सूर्य शिव उदय हुए, शक्तियों को लेकर साथ सन् 37 की है बात, थी घोर पाप की रात ज्ञान सूर्य शिव उदय हुए, शक्तियों को लेकर साथ शिव बाबा बने बागवान, बने ब्रह्मा बाबा माली माली से मिल दादियां, है फैलातीं हरियाली चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ओम् मण्डली पर आईं जब दादियां बच्ची थीं दिव्य रुहानी दृष्टि इन दादियों पे पड़ी थी ओम् मण्डली पर आईं जब दादियां बच्ची थीं दिव्य रुहानी दृष्टि इन दादियों पे पड़ी थी देखा दुनियां की हालत,खुदा स्वयं भगवान धरा पे प्रभु पधारे,छोड़ अपने परमधाम चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें वो खुद टीचर बनके, सब बच्चों को पढ़ायें वो खुद टीचर बनके, सब बच्चों को पढाये मां-बाप की पालना देके, बच्चों को ऊंचा बनाये मां - बाप की पालना देके़ बच्चों को ऊंचा बनाये बिठा के स्टीमर में कराची से भारत है लाये आबू पर्वत के बृज कोठी में, अपना डेरा डाले चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ओम् मण्डली से लेकर, ओम शांति भवन तक आई ओमशांति का मंत्र गुंजाते शांती वन तक लाई ब्रह्माकुमारियों ने किया है, ऐसा चमत्कार दसो दिशाओं में गूंज रही है, इनकी जय जय कार चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें जहां की दादी जानकी जी,बनी विश्व का सहारा तभी तो बाबा ने दादी के, सिर पर हाथ अपना फिराया जहां की दादी जानकी जी, बनी विश्व का सहारा तभी तो बाबा ने दादी के सिर पर हाथ अपना फिराया दुनिया को मधुबन का माडल, बना करके दिखाया सेवा की जो उडती परी बन,उडना सबको सिखाया चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें हम जो बने हैं,हम जो पायें हैं,इनकी मेहरबानियां प्लेटिनम जुबली की हैं सबको, लाखों बधाइयां धरती नगमें गाती है,और अम्बर फूल बिछाता है बाबा के संग दैवी कुल ये,मस्त मग्न हो गाता है चुपके चुपके, चुपके चुपके शिव बाबा ब्रह्मा के तन में आये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को, नशा चढाये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढाये ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें ज्ञानामृत पिलाके बच्चों को नशा चढ़ायें"