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" दादी प्रकाशमणिजी पुण्य आत्मा थी महान विश्व सेवा में बनी वह ब्रम्हा पिता समान दादी प्रकाशमणि पुण्य आत्मा थी महान विश्व सेवा में बनी वह ब्रम्हा पिता समान संस्था का छोटा पौधा बरगद बना दिया उसी विशाल वृक्ष की मिलती है सबको छाया ऐसी कुशल प्रशासिका मधुबन की थी वो शान पुरुषार्थ से वो बनी ब्रम्हा पिता समान उनकी मीठी सी वाणी और स्नेह ममता द्वारा हम बच्चो को मिला था प्रेम रूहानी प्यारा इसीलिएही करते थे कुर्बान उनपे जान पुरुषार्थ से बनी वह ब्रम्हा पिता समान निर्माण बन स्वमांन में शिव पिता की गोद ली हम बने समान दादी यही उन्हें है अंजली उनका ज्ञान दान संग देता प्रकाशदान पुरुषार्थ से वो बनी ब्रम्हा पिता समान _____________________________"