"पाके वरदान बनी पिताश्री समान
दादीजी थी अपनी मधुबन की शान
दादीजी थी अपनी मधुबन की शान
ओम शांति
ओम शांति
ओम शांति
मंदिर में देखते ही देवता की मूर्ति
मूर्ति के दर्शन से मिले मन को शांति
मंदिर में देखते ही देवता की मूर्ति
मूर्ति के दर्शन से मिले मन को शांति
दादीजी को देखे से ही होता समाधान
दादीजी थी अपनी मधुबन की शान
दादीजी थी अपनी मधुबन की शान
ओम शांति
ओम शांति
ओम शांति
कार्य किया शिव पिता का देश में विदेश में
ज्ञान का प्रकाश दिया साधारण वेश में
कार्य किया शिव पिता का देश में विदेश में
ज्ञान का प्रकाश दिया साधारण वेश में
विश्व शांति दूत बनी आत्मा वो महान
दादीजी थी अपनी मधुबन की शान
दादीजी थी अपनी मधुबन की शान
ओम शांति
ओम शांति
ओम शांति
हिरमान बन स्वमान में शिव पिता की गोद ली
हम बने दादी समान ये है उन्हे ये अंजली
हिरमान बन स्वमान में शिव पिता की गोद ली
हम बने दादी समान है उन्हे ये अंजली
उनका ये यादगार स्तम्भ दे प्रकाशदान
दादीजी थी अपनी मधुबन की शान
दादीजी थी अपनी मधुबन की शान
ओम शांति
ओम शांति
ओम शांति
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