

"दर पे तुम्हारे आए थोड़ा सा सर झुकाए दर पे तुम्हारे आए थोड़ा सा सर झुकाए बाहों में अपनी भर के दिल में लिया समाए अपने गले लगाए अपने गले लगाए दर पे ,दर पे ,दर पे ,दर पे हम मांगते भी क्या थे अब सोच कर ये हंसते हम मांगते भी क्या थे अब सोच कर ये हंसते सागर को छोड़कर हम थे बूंद को तरसते थे बूंद को तरसते बुझी प्यास है युगों की बुझी प्यास है युगों की हम ऐसी तृप्ति पाए बाहों में अपनी भर के दिल में लिया समाए अपने गले लगाए अपने गले लगाए दर पे ,दर पे ,दर पे ,दर पे मांगो कभी ना किसी से तुम तो नहीं भिखारी मांगो कभी ना किसी से संतान मेरी प्यारी मेरा तो सब तुम्हारा बच्चे हो अधिकारी बच्चे हो अधिकारी इतना भरा है दामन इतना भरा है दामन पग पग झलकता जाए बाहों में अपनी भर के दिल में लिया समाए अपने गले लगाए अपने गले लगाए दर पे ,दर पे ,दर पे ,दर पे"