"देह की मिट्टी से बड़ी दूर
आओ चले हम अपने घर
देह की मिट्टी से बड़ी दूर
आओ चले हम अपने घर
चांद तारो से दूर इन नजारो से दूर
चांद तारो से दूर इन नजारो से दूर
पाया प्यारा लगे है अपना घर
देह की मिट्टी से बड़ी दूर
आओ चले हम अपने घर
जहा रहते है प्यारे प्यारे शिव बाबा
ज्योति स्वरूप उनका मन में है मेरे जागा
जहा रहते है प्यारे प्यारे शिव बाबा
ज्योति स्वरूप उनका मन में है मेरे जागा
सबसे निराला रूफाई उनका
जग पे छाया जादू जीनका
चांद तारो से दूर इन नजारो से दूर
पाया प्यारा लगे अपना घर
देह की मिट्टी से बड़ी दूर
आओ चले हम अपने घर
शुभ कर्मो की नाव में बैठे
कर ले भवका सागर पार
शिव बाबा की गोद में लेटे
आंधी तूफा होंगे मेरे पतवार
नैया लगेगी अपनी किनारे
उनकी कृपा से हो जीवन उद्धार
चांद तारो से दूर इन नजारो से दूर
पाया प्यारा लगे अपना घर
देह की मिट्टी से बड़ी दूर
आओ चले हम अपने घर
चांद तारो से दूर इन नजारो से दूर
पाया प्यारा लगे है अपना घर
_____________________________"
