भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
जैसा जिसने कर्म किया है, वैसा ही फल पाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
श्रीमत पालन करले भाई, कर्म ना करियो काला
श्रीमत पालन करले भाई, कर्म ना करियो काला
लाख आंख से देख रहा है, तुझे देखने वाला
लाख आंख से देख रहा है, तुझे देखने वाला
उनकी तेज नजर से भाई, कोई नहीं बच पाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
क्या बालक, क्या संत, गृहस्थी, हो माता या कुमारी
क्या बालक, क्या संत, गृहस्थी, हो माता या कुमारी
उसकी बही में लिखी हुई है, सबकी कर्म कहानी
उसकी बही में लिखी हुई है, सबकी कर्म कहानी
बड़े बड़े वो जमा खर्च का, सही हिसाब लगाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
नहीं चले उनके दर रिश्वत, नहीं चले चालाकी
नहीं चले उनके दर रिश्वत, नहीं चले चालाकी
उनके अपने लेन देन की रीत बड़ी है बाकीं
उनके अपने लेन देन की रीत बड़ी है बाकीं
विजयीरत्न को नमन करे, और सबको रूप दिखाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
करता वही हिसाब सभी का, एक आसन पे डटके
करता वही हिसाब सभी का, एक आसन पे डटके
उनका फैसला कभी ना बदले, लाख कोई सर पटके
उनका फैसला कभी ना बदले, लाख कोई सर पटके
समझदार तो चुप रहता है, अज्ञानी शोर मचाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
जैसा जिसने कर्म किया है, वैसा ही फल पाता
भाई धर्मराज के हाथ में सब लोगों का खाता
