"दिल में दिलाराम मुख में मुस्कान
दिल में दिलाराम मुख में मुस्कान
वाणी में मधुरस की जैसे खान
ऐसी हसी को सलाम
ऐसी विभूति को प्रणाम
दिल में दिलाराम मुख में मुस्कान
दिल में दिलाराम मुख में मुस्कान
वाणी में मधुरस की जैसे खान
ऐसी हसी को सलाम
ऐसी विभूति को प्रणाम
क्षमा भाव जिनका आभूषण
प्रेम दया छलके अंग अंग में
राग द्वेष जहा पास न आए
शुभ चिंतन जिनके संग संग में
हाथ से वरदान कर्म से गुणदान
दिल में दिलाराम मुख में मुस्कान
वाणी में मधुरस की जैसे खान
ऐसी हसी को सलाम
ऐसी विभूति को प्रणाम
जो सबके दिल में बसते है
प्रभु की पालना में पलते है
बेहद में जो सदा रहते है
पर रिश्तों सा वो चलते है
मूर्छित जो इंसान भरते उसमें जान
दिल में दिलाराम मुख में मुस्कान
वाणी में मधुरस की जैसे खान
ऐसी हसी को सलाम
ऐसी विभूति को प्रणाम
दिल में दिलाराम मुख में मुस्कान
दिल में दिलाराम मुख में मुस्कान
वाणी में मधुरस की जैसे खान
ऐसी हसी को सलाम
ऐसी विभूति को प्रणाम
ऐसी हसी को सलाम
ऐसी विभूति को प्रणाम
ऐसी जीवन को प्रणाम
"
