एक दिन सांज ढले इस जग मे
एक दिन सांज ढले इस जग मे
पंछी कर रहे थे पुकार
जाना हैं घर वापस हमको
भूले हुए थे सब ही राह
भूले हुए थे सब ही राह
एक दिन सांज ढले इस जग मे
इतनेमे एक फरिश्ता आया
देख पंछीयो को मुसकाया
उसके मस्तक मनी में सब ने
एक अद्भुत को तक था पाया
एक अद्भुत को तक था पाया
वो रचता था इस सृष्टी का
ब्रम्हा बाबा था उसका नाम
पंछी बोले
पा लिया जो पाना था हमने आपके इन दो नैनो में
सृष्टी चक्र का राज है जाना
आपको हमने खूब पहचाना
आपको हमने खूब पहचाना
आपके भृकुटी मे चमके वही तो है शिव निराकार
निश्चित हैं आपकी ज्योति से
मिलेगी ऊस मंजिल की राह
मिलेगी ऊस मंजिल की राह
एक दिन सांज ढले इस जग मे
हा हा बच्चो आपकी खातिर तो पड़ा हैं बाप को आना
भाग्यशाली है वो बच्चे
जिन्होने है इस राज को जाना
जिन्होने इस राज को जाना
अपने बच्चों के लिए
लिया है मैने तन साकार
आया अबू की धरापर
सून आत्माओ की पुकार
सून आत्माओ की पुकार
जाना हैं घर वापस हमको मिल गयी हैं हमको राह
जाना हैं घर वापस हमको मिल गयी हैं हमको राह
मिल गयी हैं हमको राह
मिल गयी हैं हमको राह
