"एक रूहानी यात्रा की गाथा हम सुनाते है
शिव ही आकर ब्रम्हा के द्वारा सुंदर स्वर्ग बनाते है
गीता ज्ञान सुनाते है
एक रूहानी यात्रा की गाथा सुनाते है
शिव ही आकर ब्रह्मा के द्वारा सुंदर स्वर्ग बनाते है
गीता ज्ञान सुनाते है
काप रही थी सृष्टि सारी पाप के तूफान से
ऐसी थी संकट की घड़ी
देखा न गया भगवान से
गूंज उटा ध्वनी ओम तब शिव वतन से आते है
ज्ञान को मुरली सुनाके जग में नर से नारायण बनाते हैं
एक रूहानी यात्रा की गाथा हम सुनाते है
शिव ही आकर ब्रह्मा के द्वारा सुंदर स्वर्ग बनाते है
गीता ज्ञान सुनाते है
आबू पर्वत पर रचाया है स्वर्ग सा एक मधुबन
महामिलन की मस्ती में झूम रहा है हर मन
यही आदि है अंत यही संगम जिसको कहते है
सुख शांति का दिव्य सेहरा सबको वो पहनाते है
एक रूहानी यात्रा की गाथा हम सुनाते है
शिव ही आकर ब्रम्हा के द्वारा सुंदर स्वर्ग बनाते है
गीता ज्ञान सुनाते है
ज्ञान यज्ञ शुरू हुआ ओम मंडली की ओम ध्वनी से
उमड़ पड़ा संसार सारा मिलन मनाने प्रभु से
इस पथह दर बरसे
अनुभव हम सुनाते है
ऐसे प्यार प्रभु का पाके धन्य धन्य हो जाते है
का चलाने का अनुभव हम सुनाते है
एक रूहानी यात्रा की गाथा हम सुनाते हैं
शिव ही आकर ब्रह्मा के द्वारा सुंदर स्वर्ग बनाते है
गीता ज्ञान सुनाते है"
