ज्ञान सिंधु पिता जब तुम्हे पा लिया
ज्ञान सिंधु पिता जब तुम्हे पा लिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
जनम जनम की प्यास बुझी है
जनम जनम की प्यास बुझी है
सागर से ज्ञान अमृत पी लिया
ज्ञान सिंधु पिता जब तुम्हे पा लिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
अन्तर मन से आवाज निकले
क्या है अभी और क्या थे पहले
क्या है अभी और क्या थे पहले
स्नेह दिया सुख चैन दिया
आत्म दर्शन का नयन दिया
आत्म दर्शन का नयन दिया
जिंदगी में अलौकिक रंग भर दिया
जिंदगी में अलौकिक रंग भर दिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
भाग चली माया अब हारी
जादू भरी ऐसी याद तुम्हारी
जादू भरी ऐसी याद तुम्हारी
रोम रोम पुलकित हो जाए
आप बिना अब कुछ नहीं भाए
आप बिना अब कुछ नहीं भाए
दिल करता रहे तेरा शुक्रिया
दिल करता रहे तेरा शुक्रिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
ज्ञान सिंधु पिता जब तुम्हे पा लिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
जनम जनम की प्यास बुझी है
जनम जनम की प्यास बुझी है
सागर से ज्ञान अमृत पी लिया
ज्ञान सिंधु पिता जब तुम्हे पा लिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
हो गए तेरे हम तूने जीवन दिया
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