“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन
समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो''
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ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में
समस्या बदल जाएगी समाधान में ।
स्वमान की स्मृति और अनुभूति से ही ।
देहाभिमान बदले आत्माभिमान में ।
ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में
समस्या बदल जाएगी समाधान में ।
ये ब्राह्मण संसार सबसे है न्यारा।
छोटा सा है लेकिन बड़ा ही है प्यारा।
दिलाराम से मिला दिल का दुलार है ।
संगमयुग में पाया परमात्म प्यार है ।
यही हो रूहानी नशा अपने हर कर्म में
कर्मयोगी के लक्षण आए जीवन में ।
ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में
समस्या बदल जाएगी समाधान में ।
ज्ञान की रोशनी से शक्तियां पाए ।
योगयुक्त युक्तियुक्त जीवन बनाए ।
हर कर्म ही अपना धारणायुक्त हो ।
निरंतर सेवाधारी अनुभवी मूर्त हो ।
बनके स्वमान धारी , स्वराज्याधिकारी ।
समय की पुकार है बाबा समान बने ।
ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में
समस्या बदल जाएगी समाधान में ।
बाबा से हमने जो भी सुना है ,
अनुभव में लाकर उसको दिल में समाए ।
माया भी अनुभव को मिटा ना पाए ,
अनुभव की बात कभी भी भूल ना जाए ।
अनुभव किया जब हम आत्मा है ,
लवलीन हो जाएंगे परमात्म प्रेम में ।
ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में
समस्या बदल जाएगी समाधान में ।
