

“चारों ही सबजेक्ट में अनुभव की अथॉरिटी बन समस्या को समाधान स्वरूप में परिवर्तन करो'' ========================================= ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में समस्या बदल जाएगी समाधान में । स्वमान की स्मृति और अनुभूति से ही । देहाभिमान बदले आत्माभिमान में । ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में समस्या बदल जाएगी समाधान में । ये ब्राह्मण संसार सबसे है न्यारा। छोटा सा है लेकिन बड़ा ही है प्यारा। दिलाराम से मिला दिल का दुलार है । संगमयुग में पाया परमात्म प्यार है । यही हो रूहानी नशा अपने हर कर्म में कर्मयोगी के लक्षण आए जीवन में । ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में समस्या बदल जाएगी समाधान में । ज्ञान की रोशनी से शक्तियां पाए । योगयुक्त युक्तियुक्त जीवन बनाए । हर कर्म ही अपना धारणायुक्त हो । निरंतर सेवाधारी अनुभवी मूर्त हो । बनके स्वमान धारी , स्वराज्याधिकारी । समय की पुकार है बाबा समान बने । ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में समस्या बदल जाएगी समाधान में । बाबा से हमने जो भी सुना है , अनुभव में लाकर उसको दिल में समाए । माया भी अनुभव को मिटा ना पाए , अनुभव की बात कभी भी भूल ना जाए । अनुभव किया जब हम आत्मा है , लवलीन हो जाएंगे परमात्म प्रेम में । ज्ञानी तू आत्मा बन रहे हम स्वमान में समस्या बदल जाएगी समाधान में ।