ओम शांति
योग यानी जोड़ या संबंध
तो सबसे पहले मेरे शरीर के साथ संबंध
मै एक आत्मा और शरीर मेरी प्रजा
मै एक अच्छा राजा बनकर शरीर रूपी प्रजा का पालन करू यही है राजयोग
हे आत्मन अंतर की निगरानी तू कर अपनी
राजन तनिक तू राजधानी देख ले अपनी
हो योग युक्त कर दे काया रोगमुक्त अपनी
हो योग युक्त कर दे काया रोगमुक्त अपनी
राजन तनिक तू राजधानी देख ले अपनी
हे आत्मन
राजा सिंहासन पर बैठकर प्रजा को आज्ञा देता है वो प्रजा पालन करती है।
मै आत्मा भाल के सिंहासन पर बैठकर अपनी हर सोच के द्वारा शरीर को शुभ आज्ञाएं सकारात्मक सोच के द्वारा दे रही हूं।
मै एक सुशासक हूं।
तन के तुम्हारे भाल पर तेरा सिंहासन है
ये तख्त है अकाल का तेरा ही शासन है।
तेरा ही शासन है।
बन राजयोगी ध्यान से शुभ आज्ञा दे अपनी
हे आत्मन
राजयोग द्वारा मै अपने सत्य और पवित्र स्वरूप का अनुभव कर रही हूं
जिस स्थिति में परमात्मा से मेरे मन के तार जुड़ गई है और उनकी शक्तियों से मै हर कार्य सफलता पूर्वक कर रही हूं।
अपना सौभाग्य बना रही हूं
शुद्धता और शक्तीका तेरे ताज सिर पर है
साथ है पर मित्र प्रभु का हाथ तुजपर है।
हाथ तुजपर है।
निज भाग्य पर कर मेहरबानी नित्य ही अपनी
हे आत्मन
ऐसा न हो की काल कोई खेल ऐसा खेल ले
तेरी प्रजा तुझसे बगावत फिर नया कोई छेड दे
फिर नया कोई छेड दे
पहरा लगा रख सावधानी चित्त पर अपनी
हे आत्मन अंतर की निगरानी तू कर अपनी
राजन तनिक तू राजधानी देख ले अपनी
हो योग युक्त कर दे काया रोगमुक्त अपनी
राजन तनिक तू राजधानी देख ले अपनी
हे आत्मन
हे आत्मन
हे आत्मन
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