

"आआआआ......आआआआ....... है सबसे अच्छी भाषा, प्रेम की भाषा है सबसे अच्छी भाषा, प्रेम की भाषा नयनों से झलकती, संकल्पों की भाषा नयनों से झलकती संकल्पों की भाषा आआआआ .....आआआआ..... प्रेम बिना जग जैसे, कांटों का जंगल जहां प्रेम स्वर्ग वहीं पे, जैसे मां का आंचल आआआआ......आआआआ...... प्रेम बिना जग जैसे, कांटों का जंगल जहां प्रेम स्वर्ग वहीं पे, जैसे मां का आंचल प्यार मिले मानव क्या, प्यार मिले मानव क्या, हर प्राणी चाहता, प्राणी चाहता, नयनों में झलकती, संकल्पों की भाषा नयनों में झलकती संकल्पों की भाषा आआआआ......आआआआ...... दिल की पुकार सुन, भगवान भी आ जाता बन्धन तोड़ के सारे, प्रेम में बंध जाता आआआआ......आआआआ...... दिल की पुकार सुन, भगवान भी आ जाता बन्धन तोड़ के सारे, प्रेम में बंध जाता सच्चे दिल के प्रेम का, सच्चे दिल के प्रेम का, भगवान भी प्यासा, भगवान भी प्यासा नयनों से झलकती, संकल्पों की भाषा नयनों से झलकती, संकल्पों की भाषा आआआआ......आआआआ...... प्यार की सूखी रोटी, लगती अमृत जैसे महल के छप्पन व्यंजन, प्यार बिना फीके आआआआ......आआआआ....... प्यार की सूखी रोटी, लगती अमृत जैसे महल के छप्पन व्यंजन, प्यार बिना फीके प्यार से मिल के रहें, प्यार से मिल के रहें सब, सबकी ये आशा, प्यार मिले के रहें सब, प्रभु की ये आशा नयनों से झलकती, संकल्पों की भाषा नयनों से झलकती, संकल्पों की भाषा है सबसे अच्छी भाषा, प्रेम की भाषा है सबसे अच्छी भाषा, प्रेम की भाषा नयनों से झलकती, संकल्पों की भाषा नयनों से झलकती, संकल्पों की भाषा आआआआ.......आआआआ....... आआआआ.......आआआआ....... आआआआ.......आआआआ....... आआआआ.......आआआआ......."