हजारों बांहें खोलके बाबा बच्चों को बुलाते हैं
ओ हो बच्चों को बुलाते हैं
समाकर ज्ञान भुजाओं में वो शक्ति यां भरते जाते हैं
हजारों बांहें खोलके बाबा बच्चों को बुलाते हैं हो बच्चों को बुलाते हैं
कल्प कल्प युग के संगम युग का
ये अनुपम है नजारा
ओ ओ कल्प कल्प के इस संगम युग का ये अनुपम है नजारा
साकार मे निराकार सन्मुख मिले बेहद का सहारा
वो अपने दिव्य चितवन से जन्मोंके
वो अपने दिव्य चितवन से जन्मोंके
सुख लुटाते हैं
ओ हजारों बांहें खोलके बाबा बच्चों को बुलाते हैं
ओ बच्चों को बुलाते हैं
अपने गुणों की माला बाबा उन बच्चों को पेहनाए
ओ अपने गुणों की माला बाबा उन बच्चों को पेहनाए
जो बच्चे सदा आगे बढ़कर
जो बच्चे सदा आगे बढ़कर श्रीमत को अपनाएं
सुंदर सुहाने अनोखे मिलन में
सुंदर सुहाने अनोखे मिलन मे वरदान पाते हैं
ओ
हजारों बांहें खोलके बाबा बच्चों को बुलाते हैं
हो हो बच्चों को बुलाते हैं
समाकर ज्ञान भुजाओं में वो शक्ति यां भरते जाते हैं
हजारों बांहें खोलके बाबा बच्चों को बुलाते हैं
बच्चों को बुलाते हैं
