

हर पल की पहचान है आज, हर जागरण का बीज है आज॥ हर दिन की सुबह है आज, दिल में बजे मौन का साज़॥ हर मुरली का आदि है आज, हर मुरली का सार है आज... जो बीत गया, वो न रहा अपना; आने वाला — बस एक सपना॥ इस पल में छिपा है हर राज़, शिव का ये आव्हान है आज॥ हर मुरली का आदि है आज, हर मुरली का सार है आज... जब मिटे सब झूठे रिवाज़, तब दिखे पवित्रता का ताज। शिव को भी उस पर हो नाज़, बने वह आत्मा सरताज॥ हर लक्ष्य का आदि है आज, हर लक्षण का स्वर है आज। हर आत्मा की पुकार है आज, इस जीवन का सार है आज॥ हर मुरली का आदि है आज, हर मुरली का सार है आज... मन के आँगन खिले प्रकाश, कटे माया का मोह-पाश। दिल में गूंजे स्नेह का साज़, बहे अलौकिक वर्षा आज॥ हर मुरली का आदि है आज, हर मुरली का सार है आज॥ आज तपस्या का है क्षण, होगा पावन हमारा जीवन॥ आज दुआएँ देने का भाव, आज दुआएँ लेने का प्रवाह॥ आज सुधार का अवसर, मिटे भूलों का सफर॥ आज माफी का है मौसम, करने और माँगने की है कसम॥ आज धन्यवाद का है स्वर, भाव मन में हैं ये सुंदर॥ आज साहस की है घड़ी, विजयश्री आरती ले है खड़ी॥ आज... आज... आज... आज... आज... आज... आज... आज... आज मौन की साधना, आज तप की आराधना॥ आज प्रेम की बारिश, आज वरदानों की आशीष॥ आज उत्सव परवाज़ का, आज उत्सव — आज का॥ हर मुरली का आदि है आज, हर मुरली का सार है आज...