

"हे शिव वत्सो जागो अब तो कलियुग भी जाने वाला है हे शिव वत्सो जागो अब तो कलियुग भी जाने वाला है वह कृष्ण चला जो सतयुग से वह सतयुग आनेवाला है हे शिव वत्सो जागो अब तो कलियुग भी जाने वाला है संगमयुग के गलियारे में जब भीड़ बहुत हो जाएगी तब समय न होगा पढ़नेका फिर फिकर तू पछताएगा तब तुझे पढ़ानेवाले शिव सद्गुरु भी पास न आएंगे सद्गुरु भी पास न आएंगे हे बच्चो अब तो जाग जाओ बाबा समझाने आया है ही बच्चो अब तो जाग जाओ बाबा समझाने आया है वह कृष्ण चला जो सतयुग से वह सतयुग आनेवाला है वह कृष्ण चला जो सतयुग से वह सतयुग आनेवाला है हे शिव वत्सो जागो अब तो कलियुग भी जाने वाला है इस बने बनाए नाटकको फिर ये दोहराने आया है जब हलचल होगी दुनिया में सोनेकी जगह नहीं होगी इस उदर अग्निको शीतल करने की सामग्री नहीं होगी करने की सामग्री नहीं होगी तब उठकर क्या कर पाओगे रिश्ते भी देख न पाओगे तब कितना तुम पछताओगे तब कितना तुम पछताओगे तब कितना तुम पछताओगे क्यू है तू अजामिल बना हुआ रावण के संग में पड़ा हुआ उठकर बाबा से संग जोड़ो पाप की गठरी अब तो खोलो याद की अग्नि में तू तप जा वरना तू पछताएगा वरना तू पछताएगा बाबा तुझको पावन करके वरसा देने आया है बाबा तुझको पावन करके वरसा देने आया है वह कृष्ण चला जो सतयुग से वह सतयुग आनेवाला है हे शिव वत्सो जागो अब तो कलियुग भी जाने वाला है कलियुग भी जाने वाला है कलियुग भी जाने वाला है कलियुग भी जाने वाला है