"हो गई है शाम चलो, लौट चलें घर
हो गई है शाम चलो लौट चलें घर
प्यारा पिता बुलाता,
प्यारा पिता बुलाता,पूरा हुआ सफ़र
हो गई है शाम चलो लौट चलें घर
बड़ी शान से कभी हम, घर छोड़ कर के निकले
माता पिता बिसारे, दुनियां में राह भूले
दुनियां में राह भूले
अपने वतन से बिछड़े,मुद्दत गई गुज़र
हो गई है शाम...
डूबती थी कश्ती, मंझधार से निकाला
बड़े प्यार से उठा कर, पलकों में है सम्हाला
पलकों में है सम्हाला
पाकर के प्यार प्रभु का, क़िस्मत गई संवर
हो गई है शाम ...
दिखता था दूर से जो, कितना हसीं नज़ारा
सब देख लिया है हमने,अपना ही घर है प्यारा
अपना ही घर है प्यारा
अब तो वहीं निशाना आता हमें नज़र
हो गई है शाम, चलो लौट चलें घर
हो गई है शाम चलो लौट चलें घर
प्यारा पिता बुलाता,
प्यारा पिता बुलाता,पूरा हुआ सफ़र
हो गई है शाम, चलो लौट चलें घर .."
