Ringtone Available
Listen & download ringtone
हम बढे चलेंगे निर्भय हो जग के अंधियार मिटाएंगे कांटे जो आएंगे पथ मे चुन चुन कर उन्हें हटाएंगे हम बढे चलेंगे निर्भय हो जगह के अंधियार मिटाएंगे कांटे जो आएंगे पथ में चुन चुन कर उन्हें हटाएंगे हम बढे चलेंगे निर्भय हो जो शत्रु बनकर आएगा उसे शिव का मित बनाएंगे जो शत्रु बनकर आएगा उसे शिव का मित बनाएंगे देकर आत्म ज्ञान उन्हें हम प्रेम की धार बनाएंगे देकर आत्म ज्ञान उन्हें हम प्रेम की धार बनाएंगे हम बढे चलेंगे निर्भय हो जग के अंधियार मिटाएंगे कटे जो आएंगे पथ में चुन चुन कर उन्हें हटाएंगे हम बढे चलेंगे निर्भय हो वो कलम लगाए फूलों की हम अमृत जल से सिचेगे वो कलम लगाए फूलों की हम अमृत जल से सिचेगे वो फूल खिलाए जंगल में हम काटे फुल बनाएंगे वो फूल खिलाए जंगल में हम काटे फुल बनाएंगे हम बढे चले निर्भय हो जो शत्रु बनकर आएगा उसे शिव का प्रीत बनादेगे जो शत्रु बनकर आएगा उसे शिव का प्रीत बनादेगे देकर आत्म ज्ञान उन्हें हम प्रेम की धार बहाएंगे हम बढेचले निर्भय हो हम पापी नरको अपनाकर पापों की होली जलाएंगे हम पापी नरको अपनाकर पापों की होली जलाएंगे उनके मन के विष को पीकर अमृत का कलश पिलाएंगे हम बढ़े चलेगें निर्भय हो जग के अंधियार मिटाएंगे कांटे जो आएंगे पथ में उन्हें चुन चुन कर हटाएंगे हम बढे चलेंगे निर्भय हो हम बढ़े चलेंगे निर्भय हो हम बढे चलेंगे निर्भय हो