

सेवा के साथ-साथ अब सम्पन्न बनने का प्लैन बनाओ, कर्मातीत बनने की धुन लगाओ'' अज्ञान नींद से जागे , व्यर्थ विकल्प को त्यागे । शुद्धता का व्रत है लिया । पवित्रता का प्रण है किया । मन में अभी , यही है लगन , बाबा के संग चले हम वतन । हम बने सम्पन्न समय की है यही पुकार । कर्मातीत बनने की ही धुन हो सवार । मैं पन को हम कर लें खत्म, बाबा के संग चले हम वतन । ना हो मैं पण अभिमान का । नशा हो सदा ही स्वमान का । दुःख ये बहुत ही बढ़ने लगा है, संसार में इंसान का । दुःखियों पर करें हम रहम । बाबा के संग चले हम वतन । हम बने सम्पन्न समय की है यही पुकार । कर्मातीत बनने की ही धुन हो सवार । मैं पन को हम कर लें खत्म, बाबा के संग चले हम वतन ।