हम ब्राह्मण सो फरिश्ता फरिश्ता सो हम देवता
सर्वशक्तियों से संपन्न हम मायाजीत विजेता
स्मृति स्वरूप का तिलक लगाया है
जिम्मेवारी का ताज लगाया है
दिलतखत पर बाबा के विराज सदा
हम ब्राह्मण सो फरिश्ता फरिश्ता सो हम देवता
सीरत सूरत रूहानी हुई है मौजों में पल रहे है
हलचल में भी रहते अचल है
खुशियों में खिल रहे
सबके न्यारे सबके प्यारे फरिश्ते हम है
अपनी देह से और दुनिया से अब रिश्ते न रहे
देह का भान न हो ना हो अभिमान
करनकरावनहार बाबा को ही जान
सबकुछ वहीं करता
हम ब्राह्मण सो फरिश्ता फरिश्ता सो हम देवता
सर्वशक्तियों से संपन्न हम मायाजीत विजेता
दिव्य गुणों के गहनों से ही कर ले श्रृंगार
नई दुनिया का पद पाने का
खुद को सजाने का है यही आधार
बाबा हमारे दाता विधाता हम उनकी संतान
दाता बनके देते चले हम यही अपना है स्वमान
अपने ही ये तीनों रूप याद रहे सदा
बार बार दिल कहता
हम ब्राह्मण सो फरिश्ता फरिश्ता सो हम देवता
सर्वशक्तियों से संपन्न हम मायाजीत विजेता
स्मृति स्वरूप का तिलक लगाया है
जिम्मेदारी का ताज सजाया है
दिलतखत पर बाबा के विराज सदा
हम ब्राह्मण सो फरिश्ता फरिश्ता सो हम देवता
