हम चल दिए वतन को ले हाथ थाली भोग की
हम चल दिए वतन को ले हाथ थाली भोग की
ज्ञान के पंख ले उड़े शिव संग डोर योग की
हम चल दीए वतन को ले हाथ थाली भोग की
तन ले चले प्रकाश में हम आज वतन कि और
स्वागत की मुद्रा में खड़े बाबा दूसरी ओर
इधर से हम जा रहे उधर से वो बुला रहे
बात है संयोग की
हम चल दिए वतन को ले हाथ थाली भोग की
नयनों ही नयनों से हुई आज उनसे मुलाकात
स्वीकार करो भोग ये भावना कि है सौगात
हम आज रहे बार बार पाते रहे शक्ति अपार युक्ति है सहजयोग की
हम चल दिए वतन को ले हाथ थाली भोग की
हम चल दिए वतन को ले हाथ थाली भोग की
ज्ञान के पंख ले उड़े शिव संग डोर योग की
हम चल दिए वतन को ले हाथ थाली भोग की
हम चल दिए वतन को ले हाथ थाली भोग की
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